चुनाव ड्यूटी में लगे आदिवासी शिक्षकों की बिना जांच सीधी बर्खास्तगी पर विवाद पूर्व विधायक गुलाब कमरो बोले—यह न्याय नहीं, अन्याय की पराकाष्ठा

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मनेंद्रगढ़ (MCB) | छत्तीसगढ़

त्रि-स्तरीय पंचायत आम निर्वाचन 2025 के दौरान निर्वाचन कार्य में तैनात दो आदिवासी शिक्षकों की सेवा से बर्खास्तगी को लेकर जिले में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। बिना मेडिकल परीक्षण, बिना विभागीय जांच और बिना सुनवाई के की गई इस कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
मामले को अन्यायपूर्ण बताते हुए पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन, राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग तथा आयुक्त सरगुजा संभाग को पत्र प्रेषित कर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
मामला क्या है?
पूर्व विधायक द्वारा भेजे गए पत्र के अनुसार,
19 फरवरी 2025 को शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, ग्राम साल्ही
में निर्वाचन सामग्री वितरण के दौरान दो शिक्षकों पर मदिरा सेवन कर निर्वाचन कार्य क्षेत्र में उपस्थित रहने का आरोप लगाया गया।
अशोक कुमार सिंह (सहायक शिक्षक, शासकीय प्राथमिक शाला हर्रा टोला)
अभय कुजूर (सहायक शिक्षक, शासकीय प्राथमिक शाला चुकतीपानी)
इन्हीं आरोपों के आधार पर कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी, MCB द्वारा दोनों शिक्षकों को सेवा से पृथक करने की अनुशंसा कर दी गई।
“यह कार्रवाई जल्दबाजी और अत्यधिक कठोर” — गुलाब कमरो
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने कहा कि यह निर्णय न केवल जल्दबाजी में लिया गया है, बल्कि यह आदिवासी समाज के प्रति असंवेदनशील भी है।
उन्होंने कहा—
“आदिवासी समाज की सामाजिक-सांस्कृतिक परंपराओं में कुछ अवसरों पर पारंपरिक रूप से मदिरा का सेवन होता है। कई बार पूर्व रात्रि में सेवन की गई मदिरा की गंध अगले दिन तक बनी रहती है, जिसे गलत रूप से मदिरा सेवन का प्रमाण मान लिया जाता है।”
बिना मेडिकल, बिना जांच—सीधे बर्खास्तगी पर सवाल
पूर्व विधायक ने प्रशासन से सवाल उठाते हुए कहा कि—
न कोई मेडिकल परीक्षण कराया गया
न विभागीय जांच की गई
न ही संबंधित शिक्षकों को पक्ष रखने का अवसर दिया गया
ऐसी स्थिति में सीधे सेवा से पृथक करना संविधानिक प्रक्रिया और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है।
शासन के दिशा-निर्देशों की अनदेखी का आरोप
कमरो ने सामान्य प्रशासन विभाग के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि अनुसूचित जनजाति वर्ग के अधिकारी-कर्मचारियों के मामलों में प्रथम दृष्टया समझाइश और सुधार का अवसर दिया जाना अनिवार्य है, जिसे इस प्रकरण में नजरअंदाज किया गया।

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