छत्तीसगढ़ में धान उठाव की देरी बनी सियासी मुद्दा, चूहों के नाम पर घोटाले का आरोप जनकपुर समिति में एहतियातन चूहा मार दवा व ट्रैप उपलब्ध, कांग्रेस का सरकार पर तीखा हमला

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छत्तीसगढ़ में धान उठाव में हो रही भारी देरी अब धीरे-धीरे सियासी बहस का बड़ा मुद्दा बनती जा रही है। कवर्धा सहित कई जिलों से सामने आई वह चौंकाने वाली खबर—जहाँ लगभग 8 करोड़ रुपये के धान को चूहों द्वारा खा जाने का दावा किया गया—ने प्रदेश के अंतिम छोर पर स्थित एमसीबी जिले के विकासखंड भरतपुर में भी चिंता बढ़ा दी है।

इसी आशंका को देखते हुए जनकपुर धान खरीदी समिति में एहतियातन बड़ा कदम उठाया गया है। समिति प्रबंधन को चूहा मारने की दवाइयाँ और चूहे पकड़ने के यंत्र (ट्रैप) उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि केंद्र में लंबे समय से जाम पड़े भारी मात्रा में धान को किसी भी तरह के नुकसान से बचाया जा सके।

कांग्रेस का तीखा हमला — “चूहा नहीं, मंत्री खा रहे धान!”

धान को चूहों द्वारा खाए जाने के सरकारी दावों पर कांग्रेस ने तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि धान की जिस “चोरी” को चूहों के सिर मढ़ा जा रहा है, वह असल में भाजपा सरकार के मंत्रियों और सिस्टम की मिलीभगत का परिणाम है।

ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष अंकुर प्रताप सिंह ने साफ शब्दों में कहा—

“हम जानते हैं कि धान चूहों से नहीं, बल्कि सत्ता के संरक्षण में लूटा जा रहा है। फिर भी, ताकि एक दाना भी खराब न हो, सुरक्षा के लिहाज़ से चूहा मार दवा और ट्रैप उपलब्ध कराए गए हैं।”

वहीं पूर्व ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष रवि प्रताप सिंह ने कहा—

“जैसे कवर्धा में 8 करोड़ का धान कम पाया गया और डीएमओ ने चूहों को कारण बताया, वैसे ही महासमुंद में भी मामला सामने आया है। जनकपुर समिति में धान बड़ी मात्रा में जमा है, लेकिन उठाव नहीं हो रहा। शासन को नुकसान न हो, इसलिए सुरक्षा के तौर पर चूहा मार दवा और ट्रैप प्रबंधक को दिए गए हैं।”

अवधेश प्रताप सिंह सांसद प्रतिनिधि नगर पंचायत जनकपुर

इस समिति में लगभग 48000 कुंतल खरीदी हो चुकी है और यहां से धान का उठाओ ना होना यहां किसानों को बहुत परेशानी हो रही है धान खरीदी में भी धन उठाओ ना होने कारण किसानों को भी बहुत परेशानी हो रही खरीदी केंद्र में रखने की व्यवस्था न होना ऐसा तो नहीं कहीं वह भाजपा सरकार उन चूहों का इंतजार कर रही है कि वो चूहे जनकपुर में भी आकर  10 20 करोड़ काधान खा जाए भाजपा सरकार धान उठाओ ना करके खिलाने की प्रकिया कर रही है

बड़े सवाल अब भी कायम

धान उठाव में इतनी देरी क्यों?क्या सच में करोड़ों का धान चूहे खा सकते हैं?
या फिर ‘चूहा’ सिर्फ घोटाले को ढकने का बहाना है?

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